आज भारत के बडे शहरों में महिलायें बहुत ज्यादा असुरक्षित हो गयीं हैं। साल के शुरू में मुम्बई के एक मशहूर होटल के बाहर दो महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार की घटना समाचार का विषय बनी। उसी समय कुछ नेताओं ने यह काम उत्तर भारत के पुरुषों के सिर मढ़ने की कोशिश की। जबकि उसी दिन पंजिम और कोची जैसे शहरों से भी उसी प्रकार की खबरें आयीं।
कुछ दिन पहले एक ही दिन के समाचार पत्र में मैंने ये दो घटनाएं पढ़ीं।
१. एक युवती ने एक युवक के शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। युवक ने उस लड़की के साथ बद्ताम्जई करनी चाही तो लड़की के भाई और माँ ने युवक को कुछ कह दिया। युवक ने कुछ देर बाद उनके घर आ कर माँ और बेटे को गोली मार दी।
२ एक अमीर आदमी ने अपनी सोसायटी के सुरक्ष गार्ड से सांठ गाँठ कर ली। जब वह घर पर अकेला था तो उसने गार्ड को बुलाया और घर पर काम कर रही नौकरानी के साथ बलात्कार करने को कहा। इस व्यक्ति ने इस कुकृत्य को देखा और उके बाद उस महिला को डराया के यदि उसने इस घटना के बार में किसी से कुछ कहा तो उसे मरवा देगा।
यह वही देश है जिस में भगवान् के नारी स्वरुप को कितने ही देवियों के नाम दे कर पूजा जाता है, जहाँ एक महिला प्रधान मंत्री, महिला राष्ट्रपति और एक समय पर एक नहीं चार चार महिला मुख्य मंत्री पदाधीन हैं। भारत के इतिहास में महिलाओं के प्रति इतना जुल्म और जुर्म शायाद कभी नहीं हुआ है। तो क्या यह उन्नति की देना है, मैं नहीं मानता। उस तरह तो जर्मनी, अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों में तो महिलाएं घर के बाहर भी नहीं निकल पातीं। यह है हमारी विकृत शिक्षा और मिथ्या मूल्यों का असर जिस में बचपन से ही पुत्र को पुत्री से ज्यादा महत्वपूर्ण बताया जाता है। यह कब तक चल सकता है और इसे ठीक करने के लिए हम और आप क्या कर सकते हैं। ज़रा सोचिये और जहाँ हो सकता है इसे ठीक करने में देश की मदद करिये, धन्यवाद
Friday, 25 January 2008
Saturday, 22 December 2007
भारत का भविष्य
भारत एक महान देश...हज़ारों सालों से विश्व को राह दिखाता यह देश. लेकिन क्या आज का भारत महान रह गया है ?
हर जगह हर प्रांत में हर शहर और गाँव में निरंतर अपराध हो रहें हैं, आदमी का आदमी पर से भरोसा उठ चुका है। पडोसी यह नहीं जानते कि अपने पडोसी पर विश्वास कर सकते हैं कि नहीं।
देश में आज भी कला, बुद्धि और मेहनत की कमी नहीं है, और हमने विश्व में जहाँ भी कोशिश की है जीत ही पायी है। लेकिन एक तरफ पचौरी, ऐश्वर्या, सानिया, धोनी, टाटा, इनफोसिस और TCS के विश्व विजयी अभियान हो रहे हैं और एक तरफ खून, डकैती, बलात्कार, अपहरण और बम धमाके एक आम सी बात बन कर रह गए हैं। सच्चाई यह है कि 80% भारतवासी देश में क्या तरक्की हो रही है जानते भी नहीं ठीक से, उन्हें. अपने लिए आज का खाना, कपडा और घर और अपने भविष्य के लिए सुरक्षा जुटाने से ही फुरसत नहीं है।
हमारा प्रजातंत्र गरीबी और निरक्षरता पर निर्भर है, और देश के नेता जानते हैं कि यदि भारत के लोग पढ़ लिख गए तो उनका भांडा फूट जाएगा और वोट तो उन्हें मिलेंगे नहीं। ये नेता अपने फायदे के लिए सिर्फ ऐसी नीतियां बनाते हैं जो प्रसिद्ध हों चाहे उनको लागू करना वास्तव में एकदम असंभव या देश के लिए अहितकारी हों।
यदि देश को चलाने वाले अपनी जनता की वास्तविक भलाई नहीं सोचते, देशवासियों कि निरंतर उन्नत्ति से उनका कोई समबन्ध ही नहीं है, धर्म के नाम पर लड़ाई कराना नेताओं की मजबूरी हो तो ऐसा देश अपने इतिहास के बल पर कैसे और कब तक महान कहला सकता है। हर पढे लिखे भारतवासी को आत्म चिंतन करने की तुरंत आवश्यकता है।
हर जगह हर प्रांत में हर शहर और गाँव में निरंतर अपराध हो रहें हैं, आदमी का आदमी पर से भरोसा उठ चुका है। पडोसी यह नहीं जानते कि अपने पडोसी पर विश्वास कर सकते हैं कि नहीं।
देश में आज भी कला, बुद्धि और मेहनत की कमी नहीं है, और हमने विश्व में जहाँ भी कोशिश की है जीत ही पायी है। लेकिन एक तरफ पचौरी, ऐश्वर्या, सानिया, धोनी, टाटा, इनफोसिस और TCS के विश्व विजयी अभियान हो रहे हैं और एक तरफ खून, डकैती, बलात्कार, अपहरण और बम धमाके एक आम सी बात बन कर रह गए हैं। सच्चाई यह है कि 80% भारतवासी देश में क्या तरक्की हो रही है जानते भी नहीं ठीक से, उन्हें. अपने लिए आज का खाना, कपडा और घर और अपने भविष्य के लिए सुरक्षा जुटाने से ही फुरसत नहीं है।
हमारा प्रजातंत्र गरीबी और निरक्षरता पर निर्भर है, और देश के नेता जानते हैं कि यदि भारत के लोग पढ़ लिख गए तो उनका भांडा फूट जाएगा और वोट तो उन्हें मिलेंगे नहीं। ये नेता अपने फायदे के लिए सिर्फ ऐसी नीतियां बनाते हैं जो प्रसिद्ध हों चाहे उनको लागू करना वास्तव में एकदम असंभव या देश के लिए अहितकारी हों।
यदि देश को चलाने वाले अपनी जनता की वास्तविक भलाई नहीं सोचते, देशवासियों कि निरंतर उन्नत्ति से उनका कोई समबन्ध ही नहीं है, धर्म के नाम पर लड़ाई कराना नेताओं की मजबूरी हो तो ऐसा देश अपने इतिहास के बल पर कैसे और कब तक महान कहला सकता है। हर पढे लिखे भारतवासी को आत्म चिंतन करने की तुरंत आवश्यकता है।
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